Wednesday, October 23, 2019
पपीता खाने के फायदे

पपीता खाने के फायदे

 

पपीता एक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक फल सके फल के साथ ही इसके पेड़ में भी कई औषधीय गुण पाए जाते है। हालांकि यह फल बच्चों को कम ही भाता है, परन्तु यह कई रोगों का एक मात्र उपचार है। कच्चे पपीते में विटामिन ए और सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही आयुर्वेद शास्त्र में पपीते को लाइलाज बीमारियों को दूर करने वाला माना गया है। पपीते में विटामिन सी, विटामिन ई और बीटा कैरोटीन जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे व्यक्ति का यौवन लंबे समय तक बना रहता है। हमारे शरीर में 90% बीमारियां पेट से ही उपजती हैं। खान पान की गड़बड़ी और पाचन तंत्र की खराबी के कारण की शरीर को उचित पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। जिसके कारण ही लंबे समय के बाद शरीर में रोग उत्पन्न होने लगते हैं। इसलिए भी पपीता रोजाना की डाइट में शामिल किया जाना चाहिए। यही वो फल है जिसके सेवन मात्र से कई तरह की बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।

 

हृदय रोगों को दूर करने में

हृदय रोगों का मूल कारण कॉलेस्ट्रोल होता है। हृदय की रक्त शिराओं में जब कॉलेस्ट्रोल जमा हो जाता है तो हृदय से संबंधित बीमारियां शुरू हो जाती हैं। पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो रक्त शिराओं में कॉलेस्ट्रोल को जमा नहीं होने देता। जिसके कारण हृदय संबंधी रोगों के होने की गुंजाइश बेहद कम हो जाती है।

 

पाचन शक्ति में वृद्धि करना

आज के दौर में लोग अधिकतर फास्ट फूड को ही पसंद करते हैं। इस प्रकार का भोजन पाचन तंत्र के लिए बेहद हानिकारक है, लेकिन इसके हानिकारक होने के बारे में पता होने पर भी लोग इसके सेवन नियमित रूप से करते हैं। पपीते में कई प्रकार के पाचक एंजाइम्स होते हैं। साथ ही इसमें कई डाइट्री फाइबर्स भी होते हैं जिसके वजह से पाचन क्रिया सही रहती है और व्यक्ति कब्ज से परेशान नहीं रहता। साथ ही रोजाना पपीते का सेवन कभी कभार फास्ट फूड के सेवन से होने वाले विपरीत प्रभावों से भी हमें दूर रखता है।

 

जलने और कटने को भी ठीक करता है

पपीते में एंटी इंनफलेमेट्री गुण पाए जाते हैं। इस गुण के कारण यह सूजन की समस्या को ठीक करता है। साथ ही रगड़, छाले और जले हुए भाग पर कच्चे पपीते का रस लगाने से यह समस्या तेजी से सही हो जाती है।

 

कैंसर की रोकथाम में मददगार

पपीते में एंटी-ऑक्सीडेंट, flavonioids और phytonutrients प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो आपकी कोशिकाओं को क्षति पहुंचने नहीं देते।
कुछ अध्ययनों ने पपीते के सेवन से कोलन और प्रोस्टेट कैंसर के कम खतरे की पुष्टि भी की है।

 

मां का दूध बनाने में सक्षम

यह एक ऐसा फल है जिसे गर्भावस्था के दौरान सेवन नहीं करना चाहिए, लेकिन यही फल बच्चे के जन्म के पश्चात् मां के दूध में वृद्धि करने में सहायक होता है। डॉक्टर भी बच्चे के जन्म के बाद इस फल को खाने के लिए सुझाव देते हैं।

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